पटना: बिहार सरकार ने राज्य के नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण और राहतभरा निर्णय लिया है। अब एक साल से अधिक पुराने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र (Birth & Death Certificates) बनवाना पहले की तुलना में बेहद आसान हो गया है। पहले इन प्रमाण पत्रों के लिए एक साल से पुरानी घटनाओं में लोगों को अदालत (Court) का दरवाजा खटखटाना पड़ता था, लेकिन अब सरकार ने इस प्रक्रिया को सरल बना दिया है।
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Bihar Death & Birth Certificate Making Big New Update
अब एक साल से पुराने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना हुआ आसान – बिहार सरकार का नया कदम
पटना: बिहार सरकार ने राज्य के नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण और राहतभरा निर्णय लिया है। अब एक साल से अधिक पुराने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र (Birth & Death Certificates) बनवाना पहले की तुलना में बेहद आसान हो गया है। पहले इन प्रमाण पत्रों के लिए एक साल से पुरानी घटनाओं में लोगों को अदालत (Court) का दरवाजा खटखटाना पड़ता था, लेकिन अब सरकार ने इस प्रक्रिया को सरल बना दिया है।
नए नियम के तहत सुविधा
- जिन लोगों ने अपने बच्चों का जन्म या परिवार के सदस्य की मृत्यु का पंजीकरण एक साल के भीतर नहीं कराया है, उन्हें अब कोर्ट के आदेश की आवश्यकता नहीं होगी।
- विशेष रूप से नियुक्त अधिकृत अधिकारी (Special Officer) ऐसे मामलों में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करेंगे।
प्रक्रिया और अधिकार
- बिहार सरकार ने इसके लिए प्रमुख विकास पदाधिकारी और पटना के नगर आयुक्त को विशेष अधिकार प्रदान किए हैं।
- अब एक साल से पुरानी जन्म और मृत्यु की घटनाओं में प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार इन्हीं अधिकारियों को होगा।
- ये अधिकारी उचित दस्तावेज़ और प्रमाण की जांच के बाद प्रमाण पत्र जारी करेंगे।
पुरानी प्रक्रिया की समस्या
पहले एक साल से अधिक पुराने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए लोगों को अदालत में याचिका दाखिल करनी पड़ती थी, जिससे:
- समय की बर्बादी होती थी।
- अतिरिक्त खर्च और कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता था।
- ग्रामीण और अशिक्षित लोग इस प्रक्रिया में कठिनाई महसूस करते थे।
सरकार की मंशा
इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य:
- आम नागरिकों को त्वरित और सरल सेवाएं प्रदान करना।
- सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना।
- अनावश्यक कानूनी जटिलताओं को समाप्त करना।
लोगों के लिए लाभ
- समय की बचत
- अदालत जाने की आवश्यकता नहीं
- प्रमाण पत्र जल्दी और कम खर्च में उपलब्ध
- ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों के लिए सुविधा
Abha Card Making Big New Update
अब मरीजों के रजिस्ट्रेशन में जरूरी होगी ‘आभा आईडी’
पटना: राजधानी पटना सहित पूरे बिहार के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में अब मरीजों के रजिस्ट्रेशन के समय आभा आईडी (आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता संख्या) अनिवार्य कर दी गई है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि मरीज के डिजिटल रिकॉर्ड को बनाए रखने और स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
क्या है आभा आईडी?
आभा आईडी, जिसे Ayushman Bharat Health Account (ABHA) भी कहा जाता है, एक विशिष्ट पहचान संख्या है जिसे स्वास्थ्य से जुड़े रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने के लिए जारी किया जाता है।
- इसके माध्यम से मरीज के उपचार, जांच रिपोर्ट, दवा का इतिहास, और डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जा सकता है।
- यह आईडी देशभर के स्वास्थ्य संस्थानों में मान्य है, जिससे मरीज को बार-बार अपनी मेडिकल हिस्ट्री बताने की आवश्यकता नहीं होती।
अस्पतालों के लिए नए निर्देश
- अब मरीजों के रजिस्ट्रेशन के समय आभा आईडी दर्ज करना अनिवार्य होगा।
- अस्पताल के डॉक्टर और रेजिडेंट इस आईडी के माध्यम से मरीज के रिकॉर्ड देख सकेंगे।
- चिकित्सा कॉलेजों और डॉक्टरों पर भी यह नियम लागू होगा, और इसका पालन न करने पर कार्रवाई हो सकती है।
डिजिटल हेल्थ मिशन का हिस्सा
राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के तहत यह बदलाव लाया जा रहा है। इसका उद्देश्य है:
- एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली बनाना, जिससे मरीज के रिकॉर्ड किसी भी राज्य या अस्पताल से एक्सेस किए जा सकें।
- मरीज को तेजी से और सही इलाज दिलाना, क्योंकि डॉक्टर को उसका पूरा चिकित्सा इतिहास तुरंत उपलब्ध होगा।
- डेटा की पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना।
फायदे
- मरीज को बार-बार मेडिकल रिपोर्ट और टेस्ट रिजल्ट लेकर अस्पताल नहीं आना पड़ेगा।
- आपात स्थिति में डॉक्टर तुरंत मरीज के पुराने रिकॉर्ड देखकर बेहतर निर्णय ले सकेंगे।
- मरीज का इलाज विभिन्न अस्पतालों में सुचारू रूप से जारी रह सकेगा, चाहे वह किसी भी शहर में हो।
सरकार की तैयारी
सरकार ने स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देश दिया है कि:
- सभी अस्पतालों में रजिस्ट्रेशन काउंटर पर आभा आईडी बनाने की सुविधा होनी चाहिए।
- जिन मरीजों के पास आभा आईडी नहीं है, उनका रजिस्ट्रेशन करते समय तत्काल यह आईडी तैयार की जाए।
- चिकित्सा कॉलेज, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी यह नियम लागू किया जाएगा।