बिहार सरकार ने आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़े बच्चों और परिवारों को एक बड़ी सुविधा देने का निर्णय लिया है। राज्य के 192 सीडीपीओ (CDPO – Child Development Project Officer) कार्यालयों में आधार सेवा केंद्र खोले जाएंगे। इस कदम से न केवल बच्चों का आधार पंजीकरण आसान होगा बल्कि विभिन्न योजनाओं का लाभ भी सीधे और पारदर्शी तरीके से मिल सकेगा।
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| आर्टिकल का प्रकार | Today 04 New Important Update |
| आर्टिकल का नाम | 17 Aug की टॉप 04 सरकारी New Udpate |
| आवेदन प्रक्रिया | ऑनलाइन |
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Bihar 192 CDPO Office Adhar Centre Open New Update Aug 25
बिहार के 192 सीडीपीओ कार्यालयों में खुलेंगे आधार सेवा केंद्र: बच्चों के आधार पंजीकरण में तेजी आएगी
प्रस्तावना
बिहार सरकार ने आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़े बच्चों और परिवारों को एक बड़ी सुविधा देने का निर्णय लिया है। राज्य के 192 सीडीपीओ (CDPO – Child Development Project Officer) कार्यालयों में आधार सेवा केंद्र खोले जाएंगे। इस कदम से न केवल बच्चों का आधार पंजीकरण आसान होगा बल्कि विभिन्न योजनाओं का लाभ भी सीधे और पारदर्शी तरीके से मिल सकेगा।
क्यों ज़रूरी है यह कदम?
- बिहार में लगभग 92 लाख 89 हजार 592 बच्चे आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत हैं।
- इनमें से कई बच्चों का आधार पंजीकरण अब तक पूरा नहीं हो सका है।
- आधार बनने के बाद बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी योजनाओं का लाभ आसानी से मिलेगा।
- अभी तक आधार पंजीकरण के लिए परिवारों को निजी केंद्रों या दूर-दराज़ कार्यालयों पर निर्भर रहना पड़ता था।
अब सीडीपीओ कार्यालयों में आधार सेवा केंद्र खुलने से लोगों को स्थानीय स्तर पर ही यह सुविधा मिल जाएगी।
कब और कैसे होगा आधार पंजीकरण?
- वर्ष 2019 से अब तक कुल 92,21,000 बच्चों का आधार पंजीकरण किया गया है।
- इसके बाद भी लाखों बच्चों का नाम अब तक आधार से जुड़ नहीं पाया है।
- नए केंद्रों की मदद से अब हर बच्चे का आधार कार्ड बनाना संभव होगा।
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका माता-पिता को इस प्रक्रिया में मदद करेंगी।
आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए खास पहल
- जिन बच्चों का आधार अभी तक नहीं बना है, उनके लिए यह केंद्र सबसे ज्यादा मददगार होंगे।
- आंगनवाड़ी केंद्र से जुड़े परिवार पास के सीडीपीओ कार्यालय जाकर आसानी से आधार बनवा पाएंगे।
- आधार बनने के बाद बच्चों का नाम सभी सरकारी डेटाबेस से जुड़ जाएगा।
सरकार की योजना और बैठक में लिया गया फैसला
- समेकित बाल विकास सेवा निदेशालय और यूआईडीएआई की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
- प्रत्येक सीडीपीओ कार्यालय में आधार सेवा केंद्र सक्रिय होगा।
- इन केंद्रों के जरिए जन्म से लेकर 5 वर्ष तक के बच्चों और उनके परिवारों का आधार बनवाया जाएगा।
इससे मिलने वाले फायदे
- बच्चों का विकास और स्वास्थ्य निगरानी आसान होगी।
- आधार से जुड़े बच्चों का पोषण और स्वास्थ्य रिकॉर्ड आसानी से अपडेट होगा।
- योजनाओं का सीधा लाभ।
- आधार से जुड़ने पर बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे मिलेगा।
- पारदर्शिता और सही डेटा।
- गलत या फर्जी नामांकन खत्म होगा और वास्तविक लाभार्थियों को ही सुविधा मिलेगी।
- स्थानीय सुविधा।
- अब लोगों को आधार बनवाने के लिए दूर-दराज़ केंद्रों पर नहीं जाना पड़ेगा।
बड़ी संख्या में बच्चों को मिलेगा आधार
अब तक जिन बच्चों का आधार कार्ड नहीं बन पाया था, उनका भी पंजीकरण इन केंद्रों पर होगा। अनुमान है कि आने वाले कुछ महीनों में अधिकांश बच्चों का आधार कार्ड तैयार हो जाएगा। इससे राज्य में आधार आधारित योजनाओं की गति और तेज होगी।
Bihar Rajasv Mahaabhiyan Camp Started Aug 25
बिहार सरकार का राजस्व महाअभियान 2025: जमीन के कागजों में सुधार अब आपके दरवाजे तक
प्रस्तावना
बिहार सरकार ने आम जनता की ज़मीन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अक्सर देखा जाता है कि जमीन के कागजात यानी जमाबंदी में नाम, पिता का नाम, खाता-खेसरा, रकबा, लगान आदि में त्रुटियाँ रह जाती हैं। कभी किसी पूर्वज का नाम दर्ज रह जाता है तो कभी हिस्सेदारी गलत हो जाती है। इन गलतियों के कारण आम लोगों को जमीन संबंधी विवाद और सरकारी कार्यों में काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने “राजस्व महाअभियान” शुरू किया है। यह अभियान 16 अगस्त 2025 से 20 सितंबर 2025 तक चलाया जाएगा। इस दौरान हर घर तक राजस्व विभाग की टीम पहुँचेगी और जमीन संबंधी दस्तावेजों की त्रुटियों को सुधारेगी।
राजस्व महाअभियान का उद्देश्य
इस महाअभियान का मुख्य उद्देश्य है –
- जमीन के अभिलेखों में मौजूद अशुद्धियों को तेजी से सुधारना।
- जमाबंदी को अद्यतन (अपडेट) करना।
- लोगों को घर बैठे समाधान उपलब्ध कराना।
- लोगों का समय और पैसा दोनों बचाना।
किन समस्याओं का समाधान होगा?
इस अभियान में ज़मीन से संबंधित कई बड़ी समस्याओं का समाधान मिलेगा। इनमें प्रमुख हैं:
- जमाबंदी में त्रुटि सुधार (परिमार्जन):
यदि आपके नाम, पिता का नाम, खाता-खेसरा, रकबा, लगान आदि में कोई गलती है तो उसे सही किया जाएगा। - उत्तराधिकारी नामांतरण:
यदि जमीन आपके पिता या दादा के नाम पर दर्ज है और आप उसका उत्तराधिकारी हैं, तो नामांतरण की प्रक्रिया के तहत आपका नाम दर्ज किया जाएगा। - बंटवारा नामांतरण:
यदि परिवार में जमीन का बंटवारा हो गया है और हिस्से निर्धारित हैं, तो उस आधार पर अलग-अलग नामांतरण किया जाएगा। - छूटी हुई जमीनों का ऑनलाइन डिजिटाइजेशन:
यदि आपकी जमीन अब तक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाई है, तो उसका डिजिटाइजेशन करके ऑनलाइन रिकार्ड में शामिल किया जाएगा।
अभियान की प्रक्रिया – कैसे होगा काम?
1. घर-घर जाकर टीम करेगी संपर्क (16 अगस्त से 15 सितंबर तक)
- राजस्व विभाग की टीमें हर गांव और हर घर तक पहुँचेंगी।
- वे लोगों से जमीन से जुड़े दस्तावेज़ मांगेंगी और उनके आधार पर आवेदन तैयार करेंगी।
- लोग खुद भी वेबसाइट biharbhumi.bihar.gov.in/mah से आवेदन डाउनलोड कर सकते हैं।
2. पंचायत स्तर पर शिविर (19 अगस्त से 20 सितंबर तक)
- पंचायत सरकार भवन या अन्य सरकारी परिसर में विशेष शिविर लगाए जाएंगे।
- यहां पर लोग अपने आवेदन जमा कर सकते हैं और तत्काल रसीद प्राप्त कर सकते हैं।
- जिन मामलों में तुरंत समाधान संभव होगा, वहीं पर सुधार कर दिया जाएगा।
- बाकी मामलों की जानकारी दर्ज करके आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
आपके आवेदन की स्थिति की जानकारी कैसे मिलेगी?
- जब भी आप आवेदन जमा करेंगे, आपके मोबाइल नंबर पर OTP के साथ एक रसीद मिलेगी।
- इस रसीद की मदद से आप अपने आवेदन की स्थिति ऑनलाइन देख सकते हैं।
- इसके लिए वेबसाइट biharbhumi.bihar.gov.in पर जाकर आवेदन की स्थिति चेक करनी होगी।
अभियान की खास बातें
- यह पहल पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल है।
- लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
- गांव और पंचायत स्तर पर ही समस्याओं का निपटारा होगा।
- सभी जिलों में एक साथ यह अभियान चलाया जाएगा।
- हर आवेदक को उनके आवेदन की प्रगति की जानकारी समय-समय पर दी जाएगी।
राजस्व महाअभियान से मिलने वाले फायदे
- जमीन विवाद कम होंगे – जब अभिलेख सही होंगे तो भविष्य में विवाद की गुंजाइश कम हो जाएगी।
- सरकारी योजनाओं का लाभ आसान होगा – सही रिकॉर्ड के आधार पर किसान आसानी से कृषि ऋण, अनुदान और अन्य योजनाओं का लाभ उठा पाएंगे।
- समय और पैसा बचेगा – अब किसी को तहसील या अंचल कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
- पारदर्शिता बढ़ेगी – ऑनलाइन प्रक्रिया से कोई भी जमीन मालिक अपने कागज कभी भी देख सकता है।
- भ्रष्टाचार पर रोक – जब सारी प्रक्रिया सार्वजनिक और डिजिटल होगी तो भ्रष्टाचार पर स्वतः अंकुश लगेगा।
आवेदन करने के लिए जरूरी दस्तावेज़
यदि आप इस अभियान का लाभ लेना चाहते हैं तो आपको कुछ दस्तावेज़ तैयार रखने होंगे:
- जमीन से संबंधित कागजात (खाता-खेसरा, रसीद, परचा आदि)
- पहचान पत्र (आधार कार्ड, वोटर कार्ड आदि)
- परिवार का विवरण (उत्तराधिकारी नामांतरण के लिए)
- बंटवारे से संबंधित दस्तावेज़ (यदि लागू हो)
Doctor Police Gawahi App Launched Aug 25
डॉक्टर और पुलिसकर्मियों की गवाही अब मोबाइल एप से होगी: न्याय व्यवस्था में बड़ा बदलाव
प्रस्तावना
न्याय व्यवस्था में तेजी लाने और लंबित मामलों को समय पर निपटाने के लिए बिहार सरकार ने एक नई पहल की है। अब डॉक्टरों और पुलिसकर्मियों को कोर्ट में बार-बार पेश होकर गवाही देने की आवश्यकता नहीं होगी। उनकी गवाही एक विशेष मोबाइल एप (App) के ज़रिए दर्ज की जाएगी। यह कदम न केवल न्यायिक प्रक्रिया को सरल बनाएगा, बल्कि समय और संसाधनों की भी बड़ी बचत करेगा।
क्यों लिया गया यह निर्णय?
- अदालतों में लंबित आपराधिक मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
- डॉक्टर और पुलिसकर्मी जब गवाही देने कोर्ट जाते हैं, तो उनके मूल कार्य प्रभावित होते हैं।
- कई बार गवाही स्थगित हो जाने से उनका समय बेकार चला जाता है।
- गवाही समय पर न होने से केस लंबे समय तक लंबित रह जाते हैं।
इन सभी समस्याओं को देखते हुए सरकार ने तय किया है कि अब डॉक्टरों और पुलिसकर्मियों की गवाही डिजिटल माध्यम से होगी।
एप के ज़रिए गवाही की प्रक्रिया
- मोबाइल एप का उपयोग
- डॉक्टर और पुलिसकर्मी अपने-अपने स्थान से एप में लॉगिन करके गवाही दर्ज कर पाएंगे।
- कोर्ट से उन्हें निर्धारित समय पर नोटिफिकेशन भेजा जाएगा।
- वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही
- गवाहों की उपस्थिति एप के जरिए लाइव होगी।
- कोर्ट में जज और वकील उन्हें सीधे सुन सकेंगे और सवाल पूछ सकेंगे।
- रिकॉर्ड का संरक्षण
- गवाही की पूरी प्रक्रिया सुरक्षित सर्वर पर रिकॉर्ड होगी।
- इससे भविष्य में विवाद की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी।
डॉक्टरों और पुलिसकर्मियों के लिए लाभ
- समय की बचत: अब उन्हें कोर्ट में घंटों बैठकर इंतजार नहीं करना होगा।
- कामकाज प्रभावित नहीं होगा: डॉक्टर अस्पताल में रहते हुए और पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी पर रहते हुए भी गवाही दे सकेंगे।
- अनावश्यक यात्रा से मुक्ति: दूर-दराज़ के जिलों से आने-जाने की परेशानी खत्म होगी।
न्यायिक प्रणाली के लिए फायदे
- तेजी से केस का निपटारा – गवाह समय पर उपलब्ध होंगे तो केस लंबा नहीं खिंचेगा।
- न्याय में पारदर्शिता – डिजिटल रिकॉर्डिंग से गवाही का पूरा सबूत रहेगा।
- मामलों की बैकलॉग में कमी – कोर्ट में लंबित मामलों का बोझ घटेगा।
एप पोर्टल का महत्व
- यह पोर्टल सबसे पहले पुलिसकर्मियों के लिए 2007 में शुरू किया गया था।
- अब इसे और आधुनिक बनाकर डॉक्टरों को भी जोड़ा जा रहा है।
- भविष्य में अन्य सरकारी गवाहों को भी इस सुविधा से जोड़ा जा सकता है।
चुनौतियाँ और सावधानियाँ
- इंटरनेट कनेक्टिविटी: ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या आ सकती है।
- तकनीकी प्रशिक्षण: डॉक्टरों और पुलिसकर्मियों को एप चलाने की ट्रेनिंग देनी होगी।
- डेटा सुरक्षा: गवाही से जुड़ी जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा सिस्टम ज़रूरी है।
New Adhar Centre open at Anganwadi Kendra
आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों का अब होगा आधार रजिस्ट्रेशन: सरकार ने शुरू की नई पहल
प्रस्तावना
भारत सरकार लगातार आधार कार्ड को विभिन्न सेवाओं और योजनाओं से जोड़ रही है, ताकि लाभ सीधे ज़रूरतमंदों तक पहुँचे। इसी क्रम में अब आंगनवाड़ी केंद्रों में नामांकित बच्चों का भी आधार रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है। बिहार में इस प्रक्रिया को बड़े स्तर पर लागू किया जा रहा है, जिससे लाखों बच्चों को सीधा लाभ मिलेगा।
क्यों ज़रूरी है बच्चों का आधार रजिस्ट्रेशन?
- आधार कार्ड आज हर सरकारी योजना का आधार बन चुका है।
- बच्चों के आधार से उनकी पहचान सुनिश्चित होगी।
- पोषण आहार, स्वास्थ्य सेवाएँ और शिक्षा से संबंधित योजनाओं का लाभ सीधे बच्चों तक पहुँचेगा।
- सरकार को यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि योजनाओं का लाभ सही पात्र को ही मिल रहा है।
कैसे होगा आधार रजिस्ट्रेशन?
- विशेष आधार पंजीकरण केंद्रों की स्थापना
- बिहार सरकार ने इसके लिए 534 विशेष केंद्र बनाने की तैयारी की है।
- ये केंद्र खासतौर पर आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों के आधार रजिस्ट्रेशन के लिए ही खोले जाएंगे।
- ऑन-साइट रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया
- बच्चों के आधार पंजीकरण के लिए विशेष प्रशिक्षित ऑपरेटर नियुक्त किए जाएंगे।
- आंगनवाड़ी से जुड़े कर्मचारियों और आशा कार्यकर्ताओं की मदद से माता-पिता को बुलाया जाएगा।
- बच्चों का बायोमेट्रिक नहीं लिया जाएगा, बल्कि माता-पिता के आधार से लिंक करके रजिस्ट्रेशन होगा।
कितने बच्चों का होगा आधार रजिस्ट्रेशन?
- बिहार में आंगनवाड़ी केंद्रों से लगभग 95 लाख बच्चे जुड़े हुए हैं।
- इन सभी का आधार रजिस्ट्रेशन करने का लक्ष्य तय किया गया है।
- इस पहल के ज़रिए सभी बच्चों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना आसान होगा।
बच्चों और परिवारों को क्या होगा लाभ?
- पोषण आहार का लाभ सुनिश्चित
- जिन बच्चों का नाम आंगनवाड़ी में दर्ज है, उन्हें आधार के माध्यम से सही तरीके से पोषण आहार मिलेगा।
- स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ाव
- आधार के ज़रिए बच्चों को टीकाकरण और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं से जोड़ा जाएगा।
- शिक्षा और भविष्य की योजनाओं में मदद
- आधार होने से भविष्य में स्कॉलरशिप, स्कूल एडमिशन और अन्य शैक्षणिक योजनाओं का लाभ बच्चों को मिलेगा।
- पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर रोक
- गलत लाभार्थियों को हटाया जाएगा और असली पात्र परिवारों को ही योजनाओं का लाभ मिलेगा।
सरकार की योजना और लक्ष्य
- राज्य सरकार ने तय किया है कि सभी आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों का आधार जल्द से जल्द बनाया जाएगा।
- यह प्रक्रिया पूरी होने पर बच्चों की जानकारी एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज होगी।
- इससे बच्चों के पोषण स्तर और स्वास्थ्य पर निगरानी करना आसान होगा।
- सरकार का लक्ष्य है कि आधार आधारित ट्रैकिंग सिस्टम से बच्चों के विकास और योजनाओं के असर की सही जानकारी मिल सके।
चुनौतियाँ क्या होंगी?
- ग्रामीण क्षेत्रों में आधार रजिस्ट्रेशन केंद्रों तक पहुँच मुश्किल हो सकती है।
- सभी माता-पिता के पास आधार कार्ड उपलब्ध होना जरूरी है।
- तकनीकी समस्याएँ जैसे इंटरनेट और बिजली की कमी कई जगह बाधा बन सकती हैं।